रांची, जुलाई 1 -- रांची, विशेष संवाददाता। झारखंड हाईकोर्ट ने विभागीय जांच में प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों की अनदेखी को गंभीर त्रुटि मानते हुए राज्य सरकार की अपील खारिज कर दी है। चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी भी कर्मचारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई निष्पक्ष और विधिसम्मत प्रक्रिया के बिना नहीं की जा सकती। कोर्ट ने सेवानिवृत्त सब-इंस्पेक्टर उमेश कुमार सिंह को दी गई विभागीय सजा रद्द करने संबंधी एकल पीठ के आदेश को भी बरकरार रखा। उमेश कुमार सिंह वर्ष 1989 में प्रत्यक्ष नियुक्ति के माध्यम से सब-इंस्पेक्टर के पद पर पुलिस सेवा में शामिल हुए थे। यह भी पढ़ें- बर्खास्तगी अवैध होने पर नो वर्क नो पे का नियम लागू नहीं होता: हाईकोर्ट वर्ष 2010 में चाईबासा के मुफस्सिल थाना प्रभारी रहते हुए उन पर एक आपराधिक ...