नैनीताल, मार्च 30 -- नैनीताल, संवाददाता। कुमाऊं विश्वविद्यालय में 'मध्य हिमालयी क्षेत्र में पारंपरिक जल प्रबंधन' विषय पर सोमवार को आयोजित संगोष्ठी में विशेषज्ञों ने जल स्रोतों के सूखने पर गंभीर चिंता व्यक्त की।कार्यक्रम के मुख्य अतिथि आईसीआईएमओडी, काठमांडू (नेपाल) के विशेषज्ञ डॉ. संजीव कुमार भुचर ने बताया कि सरकारी पाइपलाइन योजनाओं पर बढ़ती निर्भरता के कारण धारा, नौला और कुंड जैसे पारंपरिक स्रोत उपेक्षित होकर सूख रहे हैं। उन्होंने कहा कि सीमेंट आधारित निर्माण और घटते हरित क्षेत्र के कारण वर्षा जल का जमीन में अवशोषण (रिचार्ज) नहीं हो पा रहा है। जलवायु परिवर्तन के चलते बर्फबारी में कमी और बढ़ता तापमान अस्तित्व के लिए खतरा बना हुआ है। पारंपरिक ज्ञान और वर्तमान संरक्षण कार्यों का व्यवस्थित रिकॉर्ड उपलब्ध न होना एक बड़ी बाधा है। डॉ. भुचर ने बताया...