गया, मार्च 10 -- गया जिले के अतरी स्थित शिल्पग्राम पत्थरकट्टी आज भी अधूरे सरकारी वादों की कहानी कह रहा है। कभी इसे ग्रामीण पर्यटन और शिल्पग्राम के रूप में विकसित करने की महत्वाकांक्षी योजना बनाई गई थी, ताकि यहां के पारंपरिक पत्थर शिल्प को वैश्विक पहचान मिल सके और शिल्पकारों की आर्थिक स्थिति मजबूत हो। लेकिन, वर्षों बीत जाने के बावजूद योजनाएं कागजों से आगे नहीं बढ़ सकीं। न तो शिल्पकारों के लिए प्रस्तावित मूलभूत सुविधाएं विकसित हो सकीं और न ही पर्यटन को बढ़ावा देने के ठोस प्रयास हुए। नतीजतन, सरकारी घोषणाओं के बीच पत्थरकट्टी के शिल्पकारों के सपने अधूरे ही रह गए। बिहार सरकार की ग्रामीण पर्यटन विकास नीति 2013 के तहत इस ऐतिहासिक गांव को पर्यटन से जोड़कर शिल्पकारों को रोजगार और अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने की परिकल्पना की गई थी। पत्थरकट्टी लगभग 400...
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