किशनगंज, अगस्त 8 -- किशनगंज। निज संवाददाता तपेदिक (टीबी) उन्मूलन केवल एक चिकित्सीय कार्यक्रम नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय और स्वास्थ्य समानता का अभियान भी है। टीबी का सबसे अधिक बोझ उन समुदायों पर पड़ता है जो आर्थिक रूप से कमजोर, भौगोलिक रूप से दूरस्थ अथवा सामाजिक रूप से वंचित हैं। ऐसे अनेक लोग, जिनमें टीबी के लक्षण मौजूद होते हैं, निजी अस्पतालों में जांच का खर्च वहन नहीं कर पाते या स्वास्थ्य सेवाओं तक उनकी पहुंच सीमित रहती है। परिणामस्वरूप संक्रमण लंबे समय तक समुदाय में फैलता रहता है। इसी चुनौती को ध्यान में रखते हुए भारत सरकार के राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम के अंतर्गत संचालित 100 दिवसीय सघन टीबी स्क्रीनिंग अभियान का उद्देश्य स्वास्थ्य सेवाओं को अस्पतालों की चारदीवारी से निकालकर सीधे उन लोगों तक पहुंचाना है, जिन्हें इसकी सबसे अधिक आवश्यक...