सरकारी नलकूप से खेतों का नहीं होता है पटवन
मोतिहारी, जुलाई 27 -- गोविंदगंज, एक संवाददाता। धान की रोपनी समाप्ति के कगार पर है। लगभग 20 प्रतिशत जो धान की रोपनी बची है वह प्रकृति पर निर्भर है।जब वर्षा होगी, तब धान की रोपनी होगी।वैसे कहने के लिए अरेराज में कई सरकारी नलकूप हैं। लेकिन एक भी काम के लिए नहीं है। एक कट्ठा खेत की भी सिंचाई सरकारी नलकूप से कभी नहीं हो पाती है। इसके लिए सरकार के स्तर से जेई व कर्मचारी की पदस्थापना है। लेकिन धरातल पर कहीं भी नलकूप चालू स्थिति में नहीं है। किसान अपने स्तर से पटवन नहीं करें तो सरकारी नलकूप से पटवन संभव है ही नहीं और कभी सुधार होने की संभावना भी नहीं दिख रही है। यह भी पढ़ें- Motihari News: संकट: जिले में 20 हजार हेक्टेयर खेतों में धान की रोपनी पर ग्रहण क्योंकि कई वर्षों से सरकारी नलकूप मे सुधार हुआ ही नहीं है। कहीं पाइप फूटा है,तो कहीं बिजली का त...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.