नई दिल्ली, अक्टूबर 20 -- सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में कहा कि सरकारी कर्मचारी के लिए नौकरी से बर्खास्तगी की सजा मौत की सजा से कम नहीं है। इस दौरान शीर्ष अदालत ने तमिलनाडु के पेरियार यूनिवर्सिटी के एक डिप्टी रजिस्ट्रार को फिर से बहाल करने का निर्देश दिया। उन्हें आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक संपत्ति रखने के आरोप में नौकरी से निकाल दिया गया था। इस दौरान जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस चंद्रशेखर की पीठ ने मद्रास उच्च न्यायालय की खंडपीठ के आदेश को रद्द करते हुए एकल न्यायाधीश के फैसले को बरकरार रखा। एकल न्यायाधीश ने आर सरवणन की सेवा बहाल की थी। शीर्ष अदालत ने कहा कि विश्वविद्यालय द्वारा गठित एक सदस्यीय आयोग की जांच रिपोर्ट से पता चलता है कि अपीलकर्ता को बिना किसी सबूत के दोषी ठहरा दिया गया। यह भी पढ़ें- सुप्रीम कोर्ट ने रोकी भोपाल में ट्विशा...