सरकारी और निजी नौकरी का अंतर मिटाना चाहिए
नई दिल्ली, जून 15 -- विभूति नारायण राय,पूर्व कुलपति एवं साहित्यकार पूरे उत्तर प्रदेश में 6 जून से 10 जून के मध्य रेलवे और बस स्टेशनों पर लोगों को थके उदास चेहरों वाली एक अनियंत्रित भीड़ दिखाई दी। इसमें वे नौजवान शरीक थे, जो किसी न किसी तरह एक सरकारी नौकरी हासिल करना चाहते हैं, भले ही यह नौकरशाही के पदक्रम में सबसे निचले पायदान पर स्थित क्यों न हो। इसके लिए वे कुछ भी करने को तैयार थे। उन्होंने महीनों, कुछ मामलों में तो वर्षों, इसके लिए शारीरिक और बौद्धिक तैयारी की थी। जिन्हें उम्मीद नहीं थी कि ईमानदारी से कुछ हो सकता है, वे खेत-बारी बेचकर दलालों की तलाश कर रहे थे। ये सब उन शहरों की तरफ भागे चले जा रहे थे, जहां उत्तर प्रदेश पुलिस के 32 हजार से अधिक कांस्टेबलों की भर्ती के लिए लिखित परीक्षा होने वाली थी। 28 लाख से कुछ अधिक अभ्यर्थियों ने आवे...
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