भागलपुर, अगस्त 4 -- भागलपुर, वरीय संवाददाता। जिले के सरकारी अस्पतालों में पिछले तीन-चार महीनों से एंटी रेबीज इम्युनोग्लोबुलिन (आरआईजी) की भारी किल्लत बनी हुई है। इस वजह से आवारा जानवरों (कुत्ता, बंदर आदि) के हमले में गंभीर रूप से घायल मरीजों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। चिकित्सकों के अनुसार, मामूली जख्मों में एंटी रेबीज वैक्सीन (एआरवी) दी जाती है, जो अस्पतालों में उपलब्ध है। हालांकि, गहरे या गंभीर जख्मों में संक्रमण को तुरंत रोकने के लिए इम्युनोग्लोबुलिन इंजेक्शन अनिवार्य होता है। ​अस्पतालों में दवा न होने के कारण गरीब और मध्यमवर्गीय मरीजों को इसे निजी मेडिकल स्टोर्स से महंगे दामों पर खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है, जिससे उन पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है। समय पर दवा न मिलने से मरीजों की जान का जोखिम भी बढ़ गया है।...