सम्यक्त्व को लेकर संशय नहीं, उसे जगाने का पुरुषार्थ करें: मुनि प्रमाण सागर
गिरडीह, सितम्बर 3 -- पीरटांड़, प्रतिनिधि। सम्यक दर्शन हुआ है या नहीं, इस संशय में उलझकर साधना को कमजोर करने की बजाय साधक को अपने भीतर सम्यक्त्व जगाने का निरंतर पुरुषार्थ करना चाहिए। सम्यक दर्शन अंत:करण की अत्यंत सूक्ष्म अवस्था है। इसे केवल बाहरी धार्मिक क्रियाओं के आधार पर पहचानना सहज नहीं है। इसलिए आत्म-संशय में उलझने की बजाय अपने भाव, विचार और आचरण को सम्यक दिशा में ले जाना जरूरी है। यह बातें गुणायतन में विराजमान राष्ट्रसंत मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज ने शंका समाधान कार्यक्रम में प्रवचन के दौरान कहीं।
साधक की मानसिकता मुनि श्री ने कहा कि साधक का जीवन इस प्रश्न में नहीं उलझना चाहिए कि मेरा सम्यक दर्शन हुआ है या नहीं। यदि इस संशय के कारण व्यक्ति धर्माचरण और आत्मसाधना से पीछे हटने लगे तो यह आध्यात्मिक विकास में बाधक बन सकता है। साधक को स...
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