सम्मलेन में भारत की प्राचीन आयुर्वेदिक चिकित्सा के बताए लाभ
हाथरस, अक्टूबर 3 -- हाथरस। दैविक दैहिक भौतिक तापा राम राज्य नहीं काहू व्यापा | रामचरित मानस की चोपाई यह ही तो बता रही है कि सतयुग तो छोडिये, त्रेता युग में भी राम राज्य में किसी प्रकार के ताप या बीमारी आदि नहीं होती थी।परमपिता परमात्मा ने तो एक ऐसी दुनिया बनाई थी। जहाँ सब सुखी थे। कोई प्रकार का दुख नहीं था। अब कल्पान्त में फिर से शिव बाबा आदि सनातन देवी देवता धर्म की पुन स्थापना करा रहे हैं। जिसे सतयुग कहा जाता है। जहाँ राजा प्रजा सब एक सामान होगी। जहाँ ना कोई बीमार होगा ना रोगी। ये बातें आनंदपुरी कॉलोनी केंद्र की राजयोग शिक्षिका बीके शांता बहिन मेला श्री दाउजी मेला में आयुर्वेद सम्मेलन में कहीं।उन्होंने यह भी पढ़ें- Jamui News: आयुर्वेदिक, यूनानी, होम्योपैथिक चिकित्सा पद्धति अपनाने से होगा लोगों को लाभ : डा. तलत कहा कि जब इन्सान देवत्व स...
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