हेमलता कौशिक, मई 22 -- उच्च न्यायालय ने कहा कि अनुकंपा नियुक्ति जरूरतमंद परिवार को दिए जाने का प्रावधान है। पहले से खुद की गुजर-बसर अच्छे से करने वाले परिवार को इस तरह की राहत नहीं दी जा सकती। उच्च न्यायालय ने दोहराया कि अनुकंपा नियुक्ति को सार्वजनिक रोजगार के वैकल्पिक तरीके या किसी मृत कर्मचारी के परिवार के लंबे समय तक चलने वाले आर्थिक पुनर्वास के साधन के तौर पर नहीं देखा जा सकता। न्यायमूर्ति शैल जैन की पीठ ने यह टिप्पणी बीएसईएस यमुना पावर लिमिटेड की एक याचिका पर सुनवाई करते हुए की। इस याचिका में कंपनी ने इंडस्ट्रियल ट्रिब्यूनल के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें कंपनी को एक मृत कर्मचारी के बेटे को अनुकंपा के आधार पर नौकरी देने पर विचार करने का निर्देश दिया गया। पीठ ने ट्रिब्यूनल के वर्ष 2014 का फैसला रद्द किया। पीठ ने कहा कि अनुकंपा निय...