मिर्जापुर, मार्च 19 -- मिर्जापुर। हम भी वही पढ़ाते हैं, पाठ्यक्रम पूरा कराते हैं और समान जिम्मेदारियां निभाते हैं जो सरकारी या सहायता प्राप्त विद्यालयों के शिक्षक निभाते हैं मगर हमें न समान वेतन मिलता है और न सेवा सुरक्षा है। बेहद कम मानदेय पर परिवार समेत गुजारा कर रहे हैं। शासन और विभागीय उपेक्षा के चलते भविष्य की चिंता रहती है। पेंशन, भविष्य निधि, बीमा या चिकित्सा सुविधाएं नहीं मिलतीं-यह पीड़ा है वित्तविहीन विद्यालयों के शिक्षकों की। वे चाहते हैं कि सरकारी अध्यापकों की तरह उन्हें भी वेतन आदि की सुविधाओं के साथ सम्मान मिले। जिले में हजारों शिक्षक वर्षों से शिक्षा की नींव मजबूत करने में लगे हैं मगर उनके अपने जीवन की नींव कमजोर बनी हुई है। नगर के भरुहना में 'हिन्दुस्तान' से बातचीत में वित्तविहीन शिक्षकों ने अपनी समस्याएं गिनाई। अंजू मिश्रा...
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