देहरादून, अप्रैल 13 -- समाज में वास्तविक समानता तभी संभव है जब उसमें बंधुत्व की भावना हो। यह बात दून विश्वविद्यालय में डॉ बीआर अंबेडकर की 135वीं जयंती के अवसर पर आयोजित एक दिवसीय अकादमिक संगोष्ठी में कार्यक्रम के मुख्य वक्ता व सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया ने कही। उन्होंने भारतीय संविधान और बाबासाहेब डॉ बीआर आंबेडकर विषय पर गहन व्याख्यान प्रस्तुत किया। उन्होंने डॉ. आंबेडकर की बंधुत्व की अवधारणा को पश्चिमी राजनीतिक मॉडलों से अलग करते हुए कहा कि जहां फ्रांसीसी क्रांति ने स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व को एक राजनीतिक लक्ष्य के रूप में लोकप्रिय बनाया, वहीं आंबेडकर की दृष्टि भारतीय समाज के मानस में गहराई से निहित थी। यह भी पढ़ें- आंबेडकर जयंती पर भाषण प्रतियोगिता आयोजित दून विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. सुरेखा ...