नई दिल्ली, अक्टूबर 12 -- जब इरादे मजबूत हों, तो कोई भी रुकावट या सामाजिक भेदभाव आपके सपनों को पंख लगाने से नहीं रोक सकता। इस बात को पूरी दुनिया के सामने साबित कर दिखाया है हैदराबाद की रहने वाली डॉ. कोय्याला रूथ जॉन पॉल ने। जिंदगी के हर मोड़ पर परिवार के विरोध, भूख, सामाजिक तिरस्कार और अदालती लड़ाइयों से गुजरने के बाद भी उन्होंने कभी हार नहीं मानी। आज वे सफलता के उस शिखर पर हैं जहां पहुंचकर उन्होंने इतिहास रच दिया है-रूथ भारत की पहली ट्रांसजेंडर पोस्ट ग्रेजुएट (PG) डॉक्टर बन गई हैं।समाज ने दिया ताना और परिवार ने छोड़ा कोय्याला रूथ जॉन पॉल का जन्म एक पुरुष के रूप में हुआ था, लेकिन बचपन से ही उनकी पहचान और भावनाएं अलग थीं। जब उन्होंने अपनी असली पहचान को स्वीकार किया, तो समाज के साथ-साथ उनके अपने परिवार ने भी उन्हें स्वीकार करने से मना कर दिय...