समाज की आत्मा के सजग चितेरे थे मुंशी प्रेमचन्द
प्रतापगढ़ - कुंडा, जुलाई 31 -- मुंशी प्रेमचंद केवल महान कथाकार नहीं बल्कि भारतीय समाज की आत्मा के सजग चितेरे थे। उन्होंने अपनी लेखनी के माध्यम से गरीबों, किसानों, मजदूरों, महिलाओं और समाज के वंचित वर्गों की पीड़ा को स्वर दिया। यह बातें शुक्रवार को कथाकार मुंशी प्रेमचन्द की जयंती पर जीआईसी परिसर में स्थापित उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण करने के बाद वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. श्याम शंकर शुक्ल ने कही। मुंशी प्रेमचन्द की जयंती पर शुक्रवार को जिले के तमाम साहित्यकार जीआईसी परिसर में स्थापित उनकी प्रतिमा के समक्ष इकट्ठा हुए। प्रतिमा पर माल्यार्पण कर साहित्यकारों ने नमन किया। वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. दयाराम मौर्य रत्न ने बताया कि मुंशी प्रेमचंद का जन्म 31 जुलाई 1880 को वाराणसी के निकट लमही गांव में हुआ था। यह भी पढ़ें- प्रेमचंद की वर्तमान महत्ता पर संगोष्ठी...
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