वाराणसी, मार्च 12 -- वाराणसी, मुख्य संवाददाता। समाजवाद सिर्फ रोटी का ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक आंदोलन है। दुखद है कि इसे नजरअंदाज कर कुछ लोगों ने स्वार्थवश इसे समानता के अधिकार से जोड़ दिया। अर्दली बाजार स्थित राजकीय पुस्तकालय में बुधवार को जाने-माने समीक्षक प्रो. इंदीवर की पुस्तक 'समाजवादः प्रयोग और पतन' के लोकार्पण और प्रो.उर्मिला मिश्र स्मृति शब्द संवाद परिचर्चा में यह विचार समाजवादी चिंतक प्रो. दीपक मलिक ने व्यक्त किया। अध्यक्षता करते हुए उन्होंने कहा कि समाजवाद मनुष्य को आर्थिक अभाव और मारक श्रम से मुक्त कर सांस्कृतिक जीवन का मौका देता है। इसके नाम पर कुछ प्रयोग बेहद घातक सिद्ध हुए। इससे इसका पतन हो रहा है। विशिष्ट अतिथि एमएलसी धर्मेंद्र सिंह ने कहा कि आचार्य नरेंद्रदेव, बाबू जयप्रकाश नारायण और डॉ. राममनोहर लोहिया ने समाजवाद को राष्ट...
Click here to read full article from source
To read the full article or to get the complete feed from this publication, please
Contact Us.