वाराणसी, मार्च 16 -- वाराणसी, वरिष्ठ संवाददाता। विशेश्वर मुखर्जी 'बिशु दा' भारतीय राष्ट्रवाद की आधारभूमि थे। वह धर्मनिरपेक्षता, जनतंत्र और समाजवाद की लड़ाई के अप्रतिम योद्धा थे। उक्त बातें पराड़कर स्मृति भवन में रविवार को आयोजित बिशु दा की जयंती पर मुख्य वक्ता प्रो.दीपक मलिक ने कही।उन्होंने कहा कि हमें समाजवाद, जनतंत्र और धर्मनिरपेक्षता पर आधारित संस्कृति की नये सिरे से व्याख्या की ज़रूरत है। इसके लिए जनता को पुन: शिक्षित करना होगा। यह इसलिए आवश्यक है क्योंकि मौजूदा शासक वर्ग यहुदीवादी इजरायल और पाकिस्तानी साम्प्रदायिकता केंद्रित माडल में बदलना चाहता है। अध्यक्षता करते हुए समाजवादी विचारक विजय नारायण ने कहा कि विशेश्वर मुखर्जी पूर्वांचल ट्रेड यूनियन आंदोलन के पुरोधा थे। वह समाजवादी -साम्यवादी आंदोलन के एक महत्वपूर्ण स्तंभ थे। अंत में दो प्र...
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