मेरठ, मार्च 5 -- कैलाश पर्वत रचना के मुख्य जिनालय में चल रहे 48 दिवसीय भक्तामर विधान एवं पाठ के 26वें दिन सर्वप्रथम मंगलाष्टक सकलीकरण के पश्चात मंत्रोच्चारण पूर्वक भगवान आदिनाथ के अभिषेक के साथ शांतिधारा की क्रियाएं की गई। गुरुवार को 91 परिवारों की ओर से भक्तामर पाठ का आयोजन किया गया। विधान के मध्य मुनि भाव भूषण जी महाराज ने प्रवचन करते हुए कहा कि इंसान के जीवन में किसी भी समय किसी भी रूप में व्यवधान उत्पन्न हो सकता है। व्यवधान है तो क्रम से उसका समाधान भी निश्चित है। दोनों ही चीजें तुम्हारे द्वारा पूर्व में किए गए कर्मों पर निर्भर करती है। अच्छे कर्म किए होंगे तो समाधान भी तत्काल होगा और बुरे कर्म किये होंगे तो भव-भावांतर का समय भी लग सकता है। सौधर्म इंद्र बनकर स्वर्ण कलश से अभिषेक जीवेंद्र जैन व शांतिधारा अमित जैन ने की। आरती का दीप उमा...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.