नई दिल्ली, दिसम्बर 31 -- कैलाश सत्यार्थी ,नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित एक पुरानी कहावत है- उम्मीद पर दुनिया कायम है। उम्मीद अनंत संभावनाओं से भरा एक सकारात्मक भाव है। मगर इन उम्मीदों को साकार करने के लिए ईमानदारी, कठोर इच्छाशक्ति, वास्तविकता की समझ, व्यावहारिक रणनीति और क्रियाशीलता आवश्यक हैं। पिछले कुछ वर्ष अकल्पनीय उपलब्धियों और अप्रत्याशित संकटों के साल रहे हैं। एआई यानी कृत्रिम बुद्धिमत्ता, अंतरिक्ष विज्ञान व चिकित्सा के क्षेत्र में नई ऊंचाइयां और विश्व की आर्थिक समृद्धि, शिक्षा के क्षेत्र मेें प्रगति जैसी उपलब्धियां एक तरफ हैं, तो कोरोना संकट और युद्धों में बढ़ोतरी (जिनमें हजारों बेकसूर बच्चों, महिलाओं व नागरिकों की हत्याएं हुईं) पर्यावरण संकट, धार्मिक व राजनीतिक अतिवाद तथा आर्थिक गैर-बराबरी में वृद्धि जैसी गंभीर चुनौतियां दूसरी ...
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