समष्टि भाव लेकर चलता है आदिवासी समाज : वंदना
वाराणसी, अगस्त 14 -- वाराणसी। विश्व आदिवासी दिवस पर गुरुवार को बीएचयू के हिंदी विभाग में संगोष्ठी और सांस्कृतिक उत्सव हुआ। आदिवासी चिंतक और कवयित्री वंदना टेटे ने कहा कि आदिवासी समाज समष्टि का भाव लेकर चलता है। सहसंबंध का अर्थ निर्भर होना नहीं है। इसके मायने एकदूसरे का सम्मान करना होता है। आदिवासी समाज की चर्चा करते हुए वंदना टेटे ने कहा कि हमलोग प्रकृतिवादी हैं। प्रकृति हमारी सर्वोच्च नियंता है। वह हमें सिखाती है कि हमलोगों में कुछ भी सुंदर-कुरूप नहीं है। हमें सभ्य-असभ्य के दायरे से बाहर निकलना होगा। उन्होंने 'पर्यावरण' को नया शब्द बताया। कहा कि आदिवासी गीतों में इसका प्रचलन नहीं मिलेगा। उन्होंने अपनी कविता 'बेखौफ नदी' का पाठ किया। हारा कांता ने स्वागत वक्तव्य दिया। हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो. श्रद्घा सिंह ने आदिवासी संस्कृति को भारतीय समाज...
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