संतकबीरनगर, मई 8 -- संतकबीरनगर, निज संवाददाता। विकास खंड बघौली अंतर्गत ग्राम सभा उतरावल में चल रहे श्रीमद्भागवत कथा में डॉ धरणीधर जी महाराज ने भगवान की महारास लीला का वर्णन किया। उन्होंने बताया कि महारास तो जीव के परब्रह्म ईश्वर के साथ मिलन की कथा है। आस्था और विश्वास के साथ भगवत प्राप्ति का फल प्राप्त होता है तो उसे रास कहा जाता है। जो भक्त ईश्वर प्रेम में आनंदित होते हैं वही जीवन में वास्तविक सुख का अनुभव कर पाते हैं।उन्होंने कहा कि जब जीव में अभिमान आता है, भगवान उनसे दूर हो जाते हैं। लेकिन जब कोई भगवान को न पाकर विरह में होता है तो उसके साथ खड़े होते हैं। यह भी पढ़ें- ईश्वर पर विश्वास करें, नहीं रुकेगा कोई कार्य इसीलिए व्यक्ति को अभिमान की राह छोड़कर संस्कार युक्त जीवन जीना चाहिए। डॉ धरणीधर ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का प्रथम विवाह विद...