प्रयागराज, अगस्त 17 -- Allahabad Highcourt: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि संविधान के अनुच्छेद 161 के तहत राज्यपाल को दोषी की सजा में छूट देने अथवा समय पूर्व रिहाई की शक्ति प्राप्त है, लेकिन इस संवैधानिक शक्ति का प्रयोग मनमाने ढंग से नहीं किया जा सकता। निर्णय नियमों और सरकार की लागू रिहाई नीति के अनुरूप होना चाहिए। अदालत ने कहा कि यदि निर्णय रिकॉर्ड पर मौजूद महत्वपूर्ण तथ्यों की अनदेखी या स्पष्ट गलती के आधार पर लिया गया है तो उसे बरकरार नहीं रखा जा सकता। न्यायमूर्ति जे.जे. मुनीर और न्यायमूर्ति तरुण सक्सेना की खंडपीठ ने राम प्रताप सिंह की याचिका पर यह महत्वपूर्ण टिप्पणी की। याची को धारा 307/34 आईपीसी में सात वर्ष के कठोर कारावास की सजा मिली थी। उसने समय पूर्व रिहाई के लिए आवेदन किया था, लेकिन राज्य सरकार ने 26 जून 2025 को उसकी मांग खारिज क...