लखनऊ, जून 20 -- समय से पहले जन्म लेने वाले (प्रीमैच्योर) शिशुओं की जिंदगी बचाने में शुरुआती घंटे बेहद अहम होते हैं। ऐसे बच्चों के अंग पूरी तरह विकसित नहीं हो पाते, जिससे उन्हें सांस लेने में तकलीफ होती है। शरीर का तापमान बनाए रखना चुनौतीपूर्ण होता है। संक्रमण से बचने और दूध पचाने में परेशानी हो सकती है। सही समय पर इलाज और विशेष देखभाल से इन शिशुओं की जान बचाई जा सकती है। यह जानकारी डॉ. प्रीति कुमार ने दी। वह शनिवार को होटल क्लार्क अवध में फेडरेशन ऑफ आब्स्टेट्रिक एंड गायनोकोलॉजिकल सोसाइटीज ऑफ इंडिया की तरफ से आयोजित कान्फ्रेंस को संबोधित कर रहीं थीं।

प्रीमैच्योर शिशुओं की चुनौतियाँ डॉ. प्रीति कुमार ने बताया कि प्रीमैच्योर बच्चों में सबसे बड़ी चुनौती फेफड़ों का पूरी तरह विकसित न होना होता है। ऐसे में ऑक्सीजन सपोर्ट, वेंटिलेशन, सीपीएपी जैसी...