समय रहते संवाद से संभल जाती स्थिति
नई दिल्ली, जुलाई 22 -- दिल्ली में हंगामा बरपा है। इसके कई कारण हैं- नीट पेपर लीक में अब तक ठोस कार्रवाई न होना और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को हिरासत में लेना। नतीजतन, संसद के मानसून सत्र के पहले दिन दिल्ली में छात्रों ने उग्र प्रदर्शन करके पूरे देश का ध्यान खींचा। भारत के लोकतांत्रिक इतिहास में संसद मार्च कोई मामूली बात नहीं है। ऐसा बहुत कम हुआ है, जब कोई प्रदर्शनकारी समूह संसद भवन के इतने पास पहुंचा हो। यह अपने आप में गंभीर प्रश्न है कि ऐसी नौबत आई ही क्यों? लगता तो यही है कि छात्रों के हितों को लेकर उदासीनता बरती गई और जब स्थिति विस्फोटक बन गई, तो दमन का रास्ता अपनाया गया। निस्संदेह, हिंसा किसी भी स्थिति में सही नहीं है, लेकिन संविधान ने सबको अभिव्यक्ति की आजादी दी है और कोई भी सरकार के नीतिगत फैसलों के खिलाफ अपनी आवाज उठा सकता ह...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.