मुजफ्फरपुर, दिसम्बर 16 -- मुजफ्फरपुर। अन्नदाता को अगर खुद भूखे पेट रहना पड़े तो इसका मतलब है कि उनकी फरियाद ठीक से सुनी नहीं जा रही है। सरकार ने किसानों के हित में अनगिनत योजनाएं चला रखी हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर इनमें मनमानी के कारण किसान महंगी खेती करने को मजबूर हैं, जिसके कारण हाड़तोड़ मेहनत के बाद भी फसल की लागत निकल नहीं पा रही है। ऐसे में छोटे किसानों को भूखे रहने तक की नौबत आन पड़ती है। जिले के किसानों की सबसे बड़ी समस्या महंगे खाद-बीज खरीदने की मजबूरी है। इनका आरोप है कि निबंधित दुकानदार सरकारी दर से अधिक मूल्य पर खाद देते हैं। साथ ही कई सप्लीमेंट लेने को विवश करते हैं। दूसरी ओर समय से बीज नहीं मिल पाता। बुआई के अंतिम समय में मिलता भी है तो उन्नत की जगह गुणवत्ताविहीन। वहीं, पारदर्शिता के लिए विभागीय स्तर पर सख्ती के दावे असरदार साब...
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