नई दिल्ली, मार्च 12 -- नई दिल्ली, प्रमुख संवाददाता। विश्व ग्लूकोमा सप्ताह के अवसर पर इंडिया हैबिटेट सेंटर में राष्ट्रीय मीडिया कॉन्क्लेव 'डिफीटग्लूकोमा' का आयोजन किया गया। कॉन्क्लेव में नेत्र विशेषज्ञों ने बताया कि ग्लूकोमा को अक्सर दृष्टि का मूक चोर कहा जाता है, क्योंकि यह बिना किसी स्पष्ट लक्षण के धीरे-धीरे आंखों की रोशनी को नुकसान पहुंचाता है। भारत में करीब 1.2 करोड़ लोग इस बीमारी से प्रभावित हैं, जबकि लगभग 90 प्रतिशत मामलों का समय पर पता नहीं चल पाता। एबीवी इंडिया के प्रबंध निदेशक सुरेश पट्टाथिल ने कहा कि लोगों को नियमित नेत्र जांच के लिए प्रेरित करना जरूरी है, ताकि बीमारी का समय रहते पता लगाया जा सके और दृष्टि हानि से बचाव संभव हो सके।

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