मुरादाबाद, दिसम्बर 22 -- नगर के मंदिर पुणे खेड़ा पर चल रही श्रीमद् भागवत कथा में कथा व्यास स्वामी नरेंद्र आनंद सरस्वती महाराज ने महाराज परीक्षित की कलयुग से भेंट वार्ता का वर्णन किया। उन्होंने बताया कि समय जब परिवर्तित होता है तब वह अपने लक्षणों को प्रकट करता है। कलियुग ने परीक्षित से मिलने से पहले राजा को अपने लक्षण दिखाए। राजा ने देखा कि मार्ग में पांच कुएं बने हैं। एक कुएं से जल आ रहा है और चार कुओं को बराबर भर रहा है। आगे देखा कि पांच कुएं बने हैं और चार कुओं से जल आ रहा है, लेकिन एक कुएं को भी नहीं भर पा रहे हैं। अर्थात कलयुग में एक माता-पिता चार सन्तानों का भरण-पोषण कर सकते हैं, लेकिन चार-चार सन्तानें भी माता-पिता का भरण-पोषण करने में असमर्थ रहते हैं। कथा व्यास ने कहा कि कलयुग में हरि का सुमिरन ही सिद्धि प्रदाता और तारक है। कथा के म...
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