जमशेदपुर, अगस्त 15 -- कॉलेजों में पठन-पाठन की प्रणाली को व्यावहारिक और रोजगारपरक बनाने के लिए सभी कॉलेजों में प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस की नियुक्ति को अनिवार्य कर दिया गया है। इस नई व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित न रखकर उन्हें बाजार की मांग के अनुसार कौशल से जुड़े कोर्स पढ़ाना है, ताकि वे अपनी पढ़ाई पूरी करते ही कॉरपोरेट जगत की जरूरतों के लिए पूरी तरह तैयार हो सकें। इस दिशा में कोल्हान विश्वविद्यालय ने अपनी कमर कस ली है और छात्रों के लिए व्यावहारिक प्रशिक्षण के रास्ते खोले जा रहे हैं।

प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस की नियुक्ति इसके तहत कॉलेज अब कॉरपोरेट कंपनियों और विभिन्न औद्योगिक संगठनों के साथ औपचारिक करार कर रहे हैं। योजना के अनुसार, स्नातक के पाठ्यक्रम में शामिल एक पूरे सेमेस्टर की अनिवार्य इंटर्नशिप के लि...