प्रयागराज, दिसम्बर 18 -- प्रयागराज। श्री रामचरितमानस सम्मेलन समिति की ओर से पथरचट्टी रामलीला कमेटी के परिसर में चल रही नौ दिन सुनिए रामकथा के तीसरे दिन अनुयायी प्रभु श्रीराम की भक्ति में गोता लगाते रहे। कथावाचक पं. मधुसूदन शास्त्री ने कहा कि प्रभु स्वभाव से कोमल हैं और उनके मन में सभी के लिए स्नेह है। प्रभु श्रीराम ने अहिल्या, केवट, जटायु व शबरी से स्नेह से मिलकर उनपर कृपा की। इसलिए भक्त प्रभु को दीनदयाल कहते हैं। प्रिया प्रियदर्शिनी ने रामकथा को भक्ति का आधार बताया तो धर्मराज शास्त्री ने कहा कि मनु व शतरूपा को दिए गए वरदान के लिए प्रभु मानव योनि में अवतरित हुए थे। अध्यक्षता लल्लू लाल गुप्त सौरभ ने की।
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