रामगढ़, जून 26 -- बरकाकाना, निज प्रतिनिधि। मुहर्रम इस्लामी वर्ष का पहला महीना है, लेकिन इसकी पहचान केवल नए साल की शुरुआत के रूप में नहीं है। यह महीना हमें सब्र, त्याग, इंसानियत, सत्य और न्याय के लिए संघर्ष करने का संदेश देता है। खास तौर पर 10 मुहर्रम, जिसे यौमे आशूरा कहा जाता है, हमें इमाम हुसैन और उनके साथियों की महान कुर्बानी की याद दिलाता है। यह भी पढ़ें- ब्लड डोनेशन फार ह्यूमेंटी शिविर आजमुहर्रम का संदेश खिदमत ए इंसानियत फेडरेशन के जनरल सेक्रेटरी मुनव्वर सैफी ने कहा कि कर्बला की धरती पर इमाम हुसैन ने अपने परिवार और साथियों के साथ अन्याय और अत्याचार के सामने झुकने के बजाय सत्य और इंसाफ का रास्ता चुना। उन्होंने यह साबित कर दिया कि हालात कितने भी कठिन क्यों न हों, इंसान को अपने सिद्धांतों और मानवता का दामन नहीं छोड़ना चाहिए। उनकी कुर्बान...