नई दिल्ली, अप्रैल 7 -- केंद्र सरकार ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट के 9 जज की संविधान पीठ से कहा कि 2018 का वह फैसला, जिसमें सभी 10 से 50 साल तक की महिलाओं को सबरीमाला मंदिर में प्रवेश की अनुमति दी गई थी, गलत था। केंद्र ने संविधान पीठ से कहा कि उस फैसले पर कानूनी आधार पर फिर से विचार करने और उसे बदलने की जरूरत है। देश के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत की अगुवाई वाली संविधान पीठ के समक्ष सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सबरीमाला मंदिर में महिलाओं को प्रवेश की अनुमति देने वाले 2018 के फैसले में की गई उस टिप्पणी कर भी सख्त एतराज जताया। टिप्पणी में कहा था कि 10 से 50 साल की उम्र की महिलाओं को मंदिर में प्रवेश से रोकना एक तरह की 'छुआछूत' है, जो संविधान के अनुच्छेद 17 का उल्लंघन करती है। सॉलिसिटर जनरल मेहता ने उक्त टिप्पणी पर आपत्ति दर्ज कराते हुए...