नई दिल्ली, अप्रैल 22 -- नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट के 9 जजों की संविधान पीठ ने बुधवार को कहा कि किसी धार्मिक संप्रदाय की किसी खास प्रथा को जरूरी या गैर-जरूरी घोषित करने के लिए कोई एक निश्चित नियम या सार्वभौमिक दिशा-निर्देश बनाना अदालत के लिए बहुत मुश्किल, अगर नामुमकिन नहीं, तो भी बहुत कठिन है। संविधान पीठ ने कहा कि ऐसा इसलिए क्योंकि हर धर्म की अपनी अनूठी परंपराएं होती हैं। इतना ही नहीं, यह भी कहा कि हिंदू समाज को अलग-अलग संप्रदायों में बंटने के बजाय, एकजुट होना चाहिए, नहीं तो कमजोर हो जाएगा। देश के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत की अगुवाई वाली 9 जजों की संविधान पीठ ने कहा कि 'यदि कोई खास हिंदू धार्मिक संप्रदाय कुछ प्रथाओं का पालन करता है, तो उन सभी को जरूरी धार्मिक प्रथाएं नहीं कहा जा सकता, अगर वे नैतिकता, सार्वजनिक व्यवस्था और स्वास्थ...
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