नई दिल्ली, अप्रैल 29 -- नई दिल्ली। विशेष संवाददाता सुप्रीम कोर्ट के 9 जजों की संविधान पीठ ने बुधवार के कहा कि सुधार के नाम पर न तो धर्म को खोखला किया जा सकता है और न ही सदियों से चली आ रही धार्मिक रीति-रिवाज और प्रथाओं के साथ छेड़छाड़ की जा सकती है। संविधान पीठ ने यह भर कहा कि 'अदालतें सुधार के नाम पर धर्म के मूल संरचना को खत्म नहीं कर सकती है और आस्था और अंतरात्मा से जुड़े मुद्दों को न्यायिक बहस का विषय नहीं बनाया जा सकता।'
महिलाओं के प्रवेश पर बहस देश के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत की अगुवाई वाली 9 जजों की संविधान पीठ ने सबरीमाला मंदिर सहित देश के विभिन्न धर्मों और संप्रदायों के धार्मिक स्थलों में पर महिलाओं के साथ भेदभावपूर्ण व्यवहार और प्रवेश पर प्रतिबंध होने से जुड़े मुद्दों पर बहस के दौरान ये मौखिक टिप्पणी की है। इस मुद्दे ...
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