नई दिल्ली, अप्रैल 21 -- प्रभात कुमार नई दिल्ली।सुप्रीम कोर्ट के 9 जजों की संविधान पीठ ने मंगलवार को सवाल किया कि 'मंदिर में यदि किसी भक्त को सिर्फ उसके जन्म, वंश या किसी अन्य स्थिति के आधार पर देवता/मूर्ति छूने से रोका जाए, तो क्या संविधान मूकदर्शक बना रहेगा? इतना हीं नहीं, संविधान पीठ ने यह भी सवाल किया कि कोई भक्त जो मंदिर में मौजूदा देवता को अपना मूल रचियता मानता है, उसके छूने मात्र से मूर्ति/देवता अपवित्र कैसे हो सकता है।'देश के प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली 9 जजों की संविधान पीठ ने यह सवाल केरल के सबरीमाला मंदिर के मुख्य तांत्री (पुजारी) की दलीलों को सुनने के बाद भी है। मंदिर के मुख्य पुजारी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता वी. गिरि ने छठे दिन की बहस की शुरुआत करते हुए संविधान पीठ से कहा कि अनुच्छेद 25 के तहत किसी भी श्रद्धालु...
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