नई दिल्ली, अप्रैल 28 -- हर्ष वी पंत,प्रोफेसर, किंग्स कॉलेज लंदन अमेरिका-ईरान युद्ध से अंतरराष्ट्रीय राजनीति की यह सच्चाई एक बार फिर उजागर हो गई है कि सैन्य श्रेष्ठता जरूरी नहीं कि हमेशा राजनीतिक रूप से श्रेष्ठ परिणाम ही दे। इतिहास अक्सर हमें याद दिलाता है कि शासन, विशेषकर वैचारिक रूप से मजबूत शासन-व्यवस्थाएं आसानी से ध्वस्त नहीं हुआ करती हैं। मार्च के अंत तक ईरान-अमेरिका युद्ध जटिल चरण में प्रवेश कर गया था। अप्रैल की शुरुआत में पाकिस्तान ने मध्यस्थता की पहल की और युद्ध-विराम घोषित हुआ, मगर यह अस्थायी युद्ध-विराम जैसा प्रतीत हुआ। अप्रैल के अंत तक स्थिति तनावपूर्ण गतिरोध में तब्दील हो गई। अब बड़े पैमाने पर हमले भले रुक गए हैं, लेकिन अमेरिका द्वारा समुद्र में और ईरान द्वारा होर्मुज जलमार्ग पर लगाई गई नाकाबंदी से यहां आर्थिक युद्ध जारी है। वा...