सीतापुर, मार्च 22 -- नैमिषारण्य। तीर्थ नगरी नैमिषारण्य में मां के दर्शन हेतु सुबह से ही भक्तों का तांता लगा रहा। श्रद्धालुओं ने चक्र तीर्थ और आदि गंगा गोमती में स्नान कर पुरोहितों को दान दक्षिणा दी। जिसके बाद आदि शक्ति ललिता देवी के दर्शन करने मंदिर पहुंचे। श्रद्धालुओं ने छत्र, नारियल, ध्वजा, चुनरी आदि सामग्रियों से मां का पूजन कर प्रसाद अर्पण किया। इस दौरान तीर्थ में जगह जगह पर भंडारा आदि का आयोजन होता रहा। मान्यता है कि मां ललिता देवी के दरबार को कोई भी भक्त खाली हाथ नहीं लौटता है। ललिता देवी मंदिर के प्रधान पुजारी ने बताया कि मां कूष्मांडा देवी दुर्गा के चौथे रूप में जानी जाती हैं। माता का स्वरूप शक्ति, ऊर्जा और सृष्टि की रचनाकार का प्रतीक है। देवी कूष्मांडा की आठ भुजाएं हैं, जिनमें उन्होंने कमंडल, धनुष, बाण, कमल का फूल, अमृत कलश, चक्र...