सप्त व्यसनों से दूर रहने वाला ही सच्चा भक्त: आर्जव सागर
बागपत, सितम्बर 11 -- अजितनाथ सभागार मंडी में मंगल प्रवचन करते हुए आचार्य आर्जव सागर महाराज ने कहा कि मंदिर या तीर्थ पर जाकर पूजा करने वाला ही सच्चा भक्त नहीं होता। सच्चा भक्त वही है, जो सप्त व्यसनों से दूर रहते हुए अहिंसा, दया और करुणा को अपने जीवन में अपनाता है। उन्होंने कहा कि आज मंदिरों में भगवान के दर्शन के लिए लंबी कतारें लगती हैं, लेकिन हमें विचार करना चाहिए कि सच्ची भक्ति क्या है। जिसके जीवन में दया और करुणा नहीं है, वह भगवान का सच्चा भक्त नहीं हो सकता। दया धर्म का मूल है। सच्चा भक्त ही भगवान को जानने का प्रयास करता है और पुरुषार्थ के माध्यम से स्वयं भी भगवान बनने की दिशा में आगे बढ़ सकता है। सभा का संचालन डॉ. श्रेयांस जैन ने किया। इस दौरान महेंद्र जैन, मुकेश जैन, प्रदीप जैन, वरदान जैन, नवीन जैन, वकील चंद जैन, जितेंद्र जैन, संजय जैन...
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