सहारनपुर, जनवरी 27 -- श्री हरि कृपा पीठाधीश्वर एवं स्वामी हरि चैतन्य पुरी महाराज ने साउथ सिटी में आयोजित कार्यक्रम में श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि सनातन धर्म का न कोई आदि है और न ही अंत, इसी कारण इसे सत्य सनातन धर्म कहा गया है। सत्य वह है जो त्रिकालाबाधित हो। जो था, है और रहेगा। जिन मत-पंथों के बनने या बिगड़ने की तिथि ज्ञात है, वे संप्रदाय कहलाते हैं, जबकि सनातन सृष्टि के आरंभ से पहले भी था और प्रलय के बाद भी रहेगा। स्वामी महाराज ने कहा कि सनातन धर्म हमारे वैज्ञानिक ऋषियों की महान देन है और यह ढकोसला नहीं बल्कि विज्ञान-सम्मत संस्कृति है। वर्तमान समय को उन्होंने सनातन के लिए स्वर्णिम काल बताते हुए कहा कि समाज में पुनः सनातन के प्रति आकर्षण बढ़ रहा है। बच्चों के मन में श्रीराम, श्रीकृष्ण, भगवान शिव, देवी-देवताओं, ऋषि-मुनियों, संत...
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