सदियों बाद भी करबला का संदेश लोगों के दिलों में है जिंदा : रिजवी
चंदौली, जून 21 -- चंदौली। संवाददाता करबला की जंग रिश्तों और वफादारी की सबसे बड़ी मिसाल है। इमाम हुसैन के सच्चे साथियों ने न केवल अपनी जान दी। बल्कि अपने जवान बेटों तक को दीन और इंसानियत की रक्षा के लिए कुर्बान कर दिया। यही कारण है कि करबला का संदेश सदियों बाद भी लोगों के दिलों में जिंदा है। यह बातें मुहर्रम के चौथे दिन शनिवार को नगर स्थित स्वर्गीय डा. अब्दुल्ला मुजफ्फर के अजाखाना-ए-रजा में मौलाना जाफर रिजवी ने तकरीर बयान करत हुए कही। मजलिस में बनारस से आई अंजुमन सज्जादिया पठानी टोला, अंजुमन अब्बासिया मकदूमाबाद, लौंदा और सिकंदरपुर की अंजुमनों के मातमी दस्तों ने नौहाख्वानी और मातम के जरिए इमाम हुसैन की शहादत को खिराजे अकीदत पेश किया। यह भी पढ़ें- मोहर्रम पर अंजुमन रिज़विया का मातमी जुलूस अकीदत के साथ निकला मातमी धुनों और या हुसैन की सदाओं स...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.