दरभंगा, मार्च 18 -- बिरौल। विवेक सम्मत शिक्षा के द्वारा ही सामाजिक बुराइयां, कुरीतियां, अंधविश्वास जनित पाखंडवाद, जात-पात और ऊंच-नीच जैसी दुर्भावनाएं दूर होती है। यह शिक्षा संत संगत से ही प्राप्त होती है। यें बातें मंगलवार को सुपौल बाजार स्थित कबीर विद्यापीठ प्रांगण में आयोजित 43 वें विराट संत सम्मेलन के दूसरे दिन समापन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए असमा कबीर मठ के महात्मा अरुण साहेब ने कही। उन्होंने कहा कि सत्संग ही वास्तविक तीर्थ स्थल एवं परिवर्तन स्थल है। इसलिए हर व्यक्ति को संत सम्राट सदगुरु कबीर के मार्गदर्शन को अपने जीवन में अपनाकर सबसे पहले अपने अंदर की दुर्भावनाओं को दूर कर स्वयं में परिवर्तन लाना चाहिए। ऐसा करने से ही परिवार, समाज और देश-दुनियां में शांति एवं आंतरिक खुशियों का साम्राज्य स्थापित होगा।
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