विकासनगर, अप्रैल 12 -- सेलाकुई, संवाददाता। बायां खाला के करणी मंदिर में चल रही भागवत कथा के तीसरे दिन रविवार को कथा व्यास ने विभिन्न प्रसंग सुनाते हुए कहा कि मनुष्यों का क्या कर्तव्य है इसका बोध भागवत कथा सुनकर ही होता है। विडंबना ये है कि मृत्यु निश्चित होने के बाद भी हम उसे स्वीकार नहीं करते हैं। निस्काम भाव से प्रभु का स्मरण करने वाले लोग अपना जन्म और मरण दोनों सुधार लेते हैं। कथा व्यास प्रभाकर पंत ने कहा कि प्रभु जब अवतार लेते हैं तो माया के साथ आते हैं।
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