भागलपुर, मई 9 -- कहलगांव , निज प्रतिनिधि  श्रीराम का अवतार सिर्फ राक्षसों की संहार के लिए नहीं बल्कि सनातन, धर्म, संत, ब्राह्मण और गोमाता की रक्षा के लिए भी हुआ था। राजा दशरथ के घर जन्म लेकर प्रभु श्रीराम ने धर्म एवं मर्यादा की स्थापना की थी। ये बातें  कहलगांव के सनोखर शिव मंदिर परिसर में आयोजित श्री महारुद्र यज्ञ के अंतर्गत चल रही श्रीराम कथा के चौथे दिन कथा वाचिका अनुराधा सहचरी ने कही।उन्होंने श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक ज्ञान और रामभक्ति का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि मनुष्य संसार में चाहे जितना भटक ले, लेकिन जब तक वह गुरु और सत्संग की शरण में नहीं आता, तब तक उसके भीतर सच्चे विवेक का उदय नहीं होता। सत्संग ही वह माध्यम है, जो चंचल और भटकते मन को स्थिर और एकाग्र बनाता है। मन की एकाग्रता के बिना जीवन में किसी भी कार्य में पूर्ण सफलता संभव न...