मऊ, जनवरी 22 -- सूरजपुर, हिन्दुस्तान संवाद। दोहरीघाट विकास खंड क्षेत्र के सूरजपुर न्याय पंचायत अंतर्गत सरयू नदी के तट पर स्थित श्रीराम जानकी मंदिर परिसर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के तीसरे दिन कथावाचक गणेश जी महाराज ने धुंधकारी गोकर्ण प्रसंग का मार्मिक वर्णन किया। उन्होंने कहा कि सत्संग और भगवत-भक्ति के प्रभाव से बड़े से बड़ा पापी भी उद्धार को प्राप्त कर सकता है। कथा में बताया कि धुंधकारी अत्यंत दुष्ट, हिंसक और लोभी स्वभाव का था। उसने अपने माता-पिता को बहुत प्रताड़ित किया, जिससे दु:खी होकर उसकी माता ने कुएं में कूदकर प्राण त्याग दिए और पिता वन चले गए। घोर पाप कर्मों के कारण धुंधकारी प्रेत योनि में भटकने लगा। अपने भाई की इस दुर्दशा को देखकर ज्ञानी गोकर्ण ने सूर्यदेव की आज्ञा से श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन कराया। प्रेत योनि में होने ...