मेरठ, फरवरी 21 -- हस्तिनापुर। अहिंसा की साधना सत्य के बिना संभव नहीं। झूठा व्यक्ति कभी अहिंसक नहीं हो सकता। मन, वाणी और आचरण यह सत्य की त्रिवेणी है परंतु आज आधुनिक युग में सत्य को केवल वाणी तक ही सीमित कर दिया गया है। उक्त प्रवचन मुनि 108 भाव भूषण महाराज ने कैलाश पर्वत पर चल रहे 48 दिवसीय भक्तामर पाठ में व्यक्त किए। विधान के 13वें दिन सर्वप्रथम भगवान आदिनाथ की प्रतिमा पर स्वर्ण कलश से अभिषेक प्रशांत जैन,, आकाश जैन, शांतिधारा नीतेश जैन ने की। आरती का दीप प्रज्ज्वलित कुसुमलता जैन ने किया। विधान व पाठ में 121 परिवारों ने भाग लेकर पुण्य का संचय किया। सांयकाल में भगवान आदिनाथ की आरती की गई। तत्पश्चात सांस्कृतिक कार्यक्रम हुए जिसमें गुरुकुल के छात्रों द्वारा मनमोहक प्रस्तुति दी गई। विधान में अरुण जैन, प्रभा जैन, आकांक्षा, निखिल, आहवान, रानू, मी...
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