नई दिल्ली, अक्टूबर 19 -- दशहरा सत्य की जीत का पावन और प्राचीन महापर्व है। तैत्तिरीय उपनिषद् में कहा गया, सत्यं वद, धर्मं चर - अर्थात सत्य बोलो और धर्म के मार्ग पर चलो। संसार में ऐसा कोई संविधान या मजहब नहीं है, जो असत्य की जीत की कामना करता हो। संसार में झूठे से झूठे इंसान को भी सत्य की जरूरत रहती है। सत्य के बिना यह संसार नहीं चल सकता, पर ध्यान दीजिए, असंख्य लोग हैं, जो असत्य से ही संसार को चलाना चाहते हैं। यह कोशिश या साजिश महाबलि रावण ने भी की थी, लेकिन वह राम के अकाट्य सत्य के सामने टिक न पाया। आज दशहरे के मूल संदेश- सत्यं वद को पूरी दुनिया स्वीकारती है। सत्य मानव सभ्यता का आधार है, इसी आधार पर मानवीयता खड़ी होती है और सच्चा समेकित या समावेशी विकास संभव होता है। एक बार सोचकर देखिए, सत्यं वद, धर्मं चर के जयघोष के बावजूद संसार का क्या ह...