जहानाबाद, अप्रैल 14 -- मखदुमपुर, निज संवाददाता। प्रखंड में विसुआ (सतुआन) का पर्व परंपरागत ढंग से मनाया गया। इस अवसर पर दान और पूजा के बाद सत्तू मीठा खाने का चलन है। बहुत से घरों पर इस अवसर पर पितरों को अर्पण किया जाता है। इसके बाद सत्तू और मीठा का दान किया जाता है। यह पर्व एक तरह से नई फसल का प्रतीक है। इस समय तक खेतों से रबी फसल घर पहुंचता है। भारत में परंपरा है की नई फसल बजाने पर सबसे पहले देवता और पितरों को याद किया जाता है। जैसे धान की उपज आने के बाद मकर संक्रांति मनाया जाता है। यह भी पढ़ें- सतुआन पर गंगा स्नान के लिए उमड़ी हजारों की भीड़ घर में चना, मसूर,मटर, जो आने के बाद। अनाज को भुन्झकर घर में सत्तू तैयार किया जाता है। इस सीजन में आमतौर पर पहले नया गुड भी उपलब्ध होता था। आम के टिकोरा बाद हो जाता है। इसलिए सत्तू मीठा और खट्टा आम खा...
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