सत्ता से सीधे सवाल करने का जरिया बनीं गजलें
बिजनौर, सितम्बर 26 -- कविता और गजलों की दुनिया के शहंशाह रहे दुष्यंत कुमार को जिसने नहीं पढ़ा अथवा जिसने नहीं जाना। उनके लिए कविता और गजलें आज भी महबूबा और शराब के इर्द गिर्द के अंतरे हैं। कॉलजयी कवि दुष्यंत कुमार की गजल और कविता सत्ता से सीधे सवाल करने का आज भी जरिया बनी हुई है। बिजनौर के नजीबाबाद स्थित राजपुर नवादा में जन्मे कवि दुष्यंत कुमार का जन्म भले ही एक सितंबर को मनाया जाए, लेकिन वास्तविकता जन्मतिथि 27 सितंबर 1931 को हुआ है। मनमौजी व्यक्तित्व के धनी कवि दुष्यंत कुमार एक सितंबर को अपना जन्मदिन मनाते थे। उसके पीछे उनका तर्क था कि 27 सितंबर आते आते सैलरी खत्म हो जाती है।
दुष्यंत कुमार की गजलें गजलकार दुष्यंत कुमार ने हिंदी कविता और गजल के ऐसे स्थायी हस्ताक्षर बने, जिनके गीत व गज़लें आम आदमी की भावनाओं या वेदनाओं को प्रकट करने मे ज़र...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.