सत्ता के विरोध में बोलने के लिए साहित्य का लिखना-पढ़ना जरूरी : प्रियंवद
प्रयागराज, अगस्त 23 -- प्रयगराज, संवाददाता। उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र (एनसीजेडसीसी) का प्रेक्षागृह रविवार को साहित्यिक सरोकारों से गुलजार रहा। अवसर था छठवें 'हिन्दवी उत्सव' के आयोजन का। कार्यक्रम के प्रथम सत्र में मुख्य अतिथि वरिष्ठ साहित्यकार प्रियंवद ने कहा कि साहित्य का मुकाबला सत्ताओं से है, इसलिए साहित्य को पढ़ा जाना चाहिए। सत्तााओं का पहचाने के लिए चार सूत्र हैं जिसमें राज्य सत्ता, धर्म सत्ता, समाज सत्ता और पूंजी सत्ता है। इसमें किसी एक के पक्ष में होने पर सभी एक हो जाते हैं। इसका विरोध करने वाला साहित्यकार ही अकेला और निहत्था होता है। सत्ता के विरोध में बोलने के लिए साहित्य को लिखना और पढ़ना चाहिए। स्वागत संबोधन में रंग निर्देशक प्रवीण शेखर ने हिन्दवी उत्सव को साहित्य, कविता व जलसा रूपी आकाशगंगा का प्रतीक बताया।
कविता प...
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