लखीमपुरखीरी, मार्च 11 -- नगर के मुन्नूगंज वार्ड नंबर 5 में आयोजित श्रीशिव महापुराण कथा के चौथे दिन बुधवार को कथा व्यास श्रीधाम वृंदावन के आचार्य विष्णाशरण जी महाराज ने सती शंकर चरित्र, दक्ष यज्ञ में सती के जाने, पार्वती जन्म तथा भगवान शिव-पार्वती विवाह प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन किया। आचार्य ने कथा के माध्यम से बताया कि सती ने पिता दक्ष के यज्ञ में भगवान शिव का अपमान सहन न कर आत्मदाह कर लिया था। इसके बाद पार्वती के रूप में उनका पुनर्जन्म हुआ और कठोर तपस्या के बाद भगवान शिव से उनका विवाह संपन्न हुआ। कथा सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। कथा का आयोजन प्रतिदिन दोपहर 3 बजे से सायं 6 बजे तक किया जा रहा है। आगामी 15 मार्च को हवन-पूर्णाहुति एवं प्रसाद वितरण के साथ कार्यक्रम का समापन होगा। आयोजन में क्षेत्र के बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित होकर ...