सतलुज का एकतरफा सच
नई दिल्ली, जुलाई 18 -- क्या गोविंद राम और राजन के नाम जानते हैं आप? यदि नहीं, तो बता दूं कि अगर गोविंद राम जिंदा होते, तो शायद सतलुज जैसी किसी फिल्म में खलनायक का किरदार उनके नाम पर रचा गया होता। वह कौन थे? उनके साथ क्या हुआ? इसकी चर्चा कुछ देर बाद, पहले सतलुज की बात। संयोग से यह फिल्म जिस दिन ओटीटी पर रिलीज हुई, उसी दिन उसे समूचा देख गया। फिल्म में दिलजीत दोसांझ सहित सभी कलाकारों का काम काबिले-तारीफ है। पटकथा, लाइट, बैकग्राउंड, साउंड और संवाद भी अच्छे हैं। हालांकि, फिल्म देखते वक्त कई बार लगा कि यह तो उस समय का अधूरा और एकतरफा सच है। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का समर्थक होने के बावजूद यह तथ्य मुझे फिल्म देखने के दौरान बार-बार कचोटता रहा। मैं जानता हूं कि न तो केपीएस गिल खलनायक थे और न ही पंजाब पुलिस कभी पिंडारियों के गिरोह में तब्दील हुई थ...
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